
संजय मग्गू, पलवल
करीब पांच वर्ष से जिले से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग को छहमार्गीय करने का काम चल रहा है। करीब चार वर्ष जब इसने जिले में गति पकड़नी शुरू की थी, हरे-भरे शीशम के पेड़ों की भी बलि दी गई। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में करीब 20 हजार हरे-भरे पेड़ विकास की बलि चढ़ गए। हालांकि यह बात दीगर है कि विकास के दावे आजतक मूंह चिढ़ा रहे हैं तथा अधर में लटका एलिवेटेड रोड का निर्माण हरियाली को दफन करने की सजा के तौर पर दिख रहा है।
राजमार्ग के छह मार्गीय किए जाने सहित कई आवासीय सोसायटी भी अस्तित्व में आई तथा संजय गांधी पार्क व गुलमोहर पार्क भी आज कंकरीट के जंगल में बदल चुके हैं। पेड़ कटे हैं, तो निश्चित रूप से इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ना लाजमी है। काटे गए पेड़ों के बदले लाखों की तादाद में पौधे लगा कर ही भविष्य की भरपाई कर सकते हैं अब चूंकि मानसून नजदीक है, इसलिए आमजन एवं समाज सेवी संस्थाएं पौधारोपण एवं उनकी पेड़ बनने तक उनका संरक्षण करके पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने में अपना योगदान दे सकते हैं।
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कटे पेड़ों के बदले नूंह में पौधारोपण का दावा :
राष्ट्रीय राजमार्ग के छहमार्गीय करने के चलते काटे गए पेड़ों के बदले में मेवात में पौधारोपण का दावा किया जाता है। वन विभाग के अधिकारी दावा करते हैं कि पलवल से काटे गए पेड़ों के बदले में चार लाख से अधिक पौधे नूंह जिले के बसई मेव, कोटा खंडेलवा, पल्ला, राठीवास में रोपे गए हैं। हालांकि इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि वाकई पलवल से बलि दिए गए पेड़ों के बदले में नूंह में पौधे लगे भी हैं या नहीं। पलवल के वन क्षेत्र को नूंह में लगाए जाने पर खंड वन अधिकारी अमरदीप कहते हैं कि इस प्रकार की योजना है जब कहीं पेड़ काटे जाते हैं तथा उस जिले में जगह नहीं होती तो पास लगते जिले में उनके बदले में पौधे लगाए जाते हैं। हालांकि अमरदीप का तर्क यह भी है कि क्योंकि वे पलवल में अभी छह माह से ही आए हैं तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि वे पौधे कहां लगाए गए।
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जिले में तीन लाख पौधे लगाने का लक्ष्य :
प्रदूषण नियंत्रण के लिए पौधारोपण सबसे बड़ा सहारा है तो इस बार भी वन विभाग ने जिले में तीन लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। वन विभाग ने आगामी मानसून सीजन के लिए पौधागिरी अभियान, जल शक्ति अभियान तथा वन विभाग द्वारा खुद पौधे रोपने के अभियान सहित तीन योजनाएं के तहत जिले की तीन पौधशालाओं में पौधे तैयार किए हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें, तो पौधे तैयार करने के साथ-साथ इस बात का ध्यान रखा गया है कि यह यहां के मौसम, मिट्टी, पानी व हवा के अनुकूल हों, ताकि उनका रखरखाव व पालन-पोषण ठीक से हो सके। योजना के तहत नीम, पिलखन, बड़, पीपल, चक्रेसिया, मालश्री, अर्जुन, कीकर, फ्रांस, पहाड़ी पापड़ी, अमलताश, गुलमोहर, जामुन, पसेंदु सहित 31 प्रजातियों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। वन विभाग हर उस जगह पौधे लगाने का प्रयास करेगा, जहां-जहां उसे खाली जगह मिल जाएगी। बाकी सड़कों के किनारे, सुलतानपुर, पलवल, हसनपुर, दीघौट आदि वन क्षेत्र में, गांवों में पंचायत क्षेत्र, संस्थागत भूमि क्षेत्र जैसे स्कूल, कालेज, अस्पताल, पशु अस्पताल, धार्मिक स्थलों के अलावा नहरों के किनारे, ड्रेनों पर उपलब्ध खाली जगह जहां उपलब्ध होगी वहां पौधे लगाए जाएंगे।
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जिस गति से आबादी बढ़ रही है, सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ रही है, विकास परियोजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए वन क्षेत्र कम हो रहा है। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है। पेड़ों से ही पर्यावरण संरक्षित हो सकता है। जिला प्रशासन भी वन विभाग तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से शहर में गुलमोहर तथा फलदार पौधों जामुन व अमरूद लगाने की तैयारी कर रही है। मेरी अपील यही है कि आम हों या खास, जिसको जहां खाली जगह मिलती है, वहां पौधे जरूर लगाएं, उसकी देखभाल करें।
– नरेश नरवाल, जिला उपायुक्त
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वन विभाग ने पौधारोपण की व्यापक तैयारी की है, तथा तीन पौधाशालाओं में पौध तैयार कर ली गई हैं। थोड़ी ठीक बारिश होने पर पौधारोपण अभियान को गति दी जाएगी। पौधागिरी, जल शक्ति तथा वन विभाग द्वारा पौधारोपण के तहत तीन लाख पौधे रोपने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
– अमरदीप, रेंज वन अधिकारी
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