आदमी क्यों आखिर अपने को दूसरे से तौलता है ?

क्या जरूरत है? तुम तुम जैसे हो; दूसरा दूसरा जैसा है।यह अड़चन हम उठाते क्यों हैं ? पौधे नहीं उठाते।...

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