यात्रा करो

                                                     — ज्ञो एवान

                                                  रूपांतरण  : सतीश आर्य 

यात्रा करो 1

Pic Courtesy – https://www.wanderluststorytellers.com/traveling-to-india-tips-advice/    

      यात्रा करो

      वर्ना तुम बन जाओगे नस्लवादी

      और विश्वास होते जाएँगे पक्के

      कि तुम्हारी चमड़ी का रंग ही है सबसे बढ़िया

      और तुम्हारी भाषा सबसे रूमानी

      और तुम ही बने हो श्रेष्ठ बनने के लिए .

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       यात्रा करो

       नहीं करोगे यदि यात्रा तुम

        तो रह जाओगे अधकचरे तुम

       नए विचारों के अंधड़ नहीं झिंझोड़ेगे तुम्हें

        तुम्हारे सपनो को लगेगा लकवा ,

         टाँगे लड़खड़ाएँगी उनकी .

         जो कहेगा टेलिविज़न वही मान लोगे तुम

          और विश्वास करोगे उनका जो घड़ेंगे

           काल्पनिक दुश्मन तुम्हारे  लिए

           दुश्मन जो ढाँप लेंगे तुम्हारे डरे हुए

           मन को काले कम्बल की तरह

           और डराएँगे तुम्हें हर पल .

           दुआ , सलाम करोगे तुम

           कहोगे , ” ख़ुशामदीद , स्वागत है तुम्हारा “.

           निकलेगा तुम्हारे होठों से किसी के लिए

           ” बड़ी ख़ुशी हुई आपसे  मिल कर “.

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          यात्रा करो

          घर से निकलो , सैर करो दुनिया की

          क्योंकि यात्रा सिखाती है तुम्हें हर अजनबी

           को यह कहना : “अच्छी सुबह हो तुम्हारी “

           चाहे फिर  दुनिया के किसी भी कोने से आया हो  वह .

 

          यात्रा करो

          क्योंकि यात्रा ही सिखाती है हमें शुभ रात्रि कहना

          चाहे ज़हर से लबालब भरा हो जिगर अपना .

 

          यात्रा करो

          क्योंकि यात्रा ही सिखाती है हमें प्रतिरोध करना

          और सिखाती है हमें स्वयं पर निर्भर होना

          और  बिना लाग लपेट के स्वीकार करना दूसरों को

          ठीक वैसे ही जैसे हैं वे , और वैसे ही जैसे नहीं हैं वे

        और शायद  जिनके लिए बदलना मुश्किल का सबब है .

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         यात्रा करो

         सीखने और मानने के लिए

         कि एक बड़े परिवार के सदस्य हैं हम

         परिवार जो देशों  की भौगोलिक सीमाओं से बड़ा है ,

          मुक्त है जो परम्परा से , संस्कृति से भी .

          यात्रा सिखाती है सीमाओं से मुक्त होना हमें .

 

           यात्रा नहीं करोगे तुम तो लगेगा

           एक खूँटे से बँधे हो तुम ,

           या हो फिर किसी कूँऐ के मेंढक .

           यात्रा कर देगी आज़ाद तुम्हें

            खुले पंख उड़ोगे तुम  एक अब तक

            अनजाने, पर अद्भुत  संसार

               को देखने  के लिए .

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[ ज्ञो एवान एक इटालीयन कवि और पॉप सिंगर हैं . अंग्रेज़ी में अनुवादित यह कविता मेरे मित्र अमित डागर ने मुझे भेजी थी कुछ दिन पहले . मुझे अच्छी लगी और मैंने सोच कि क्यों इसे हिंदी में रूपांतरित कर दूँ . परिणाम आपके सामने है . ठुकरा दो या प्यार करो . —- सतीश आर्य ]

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