Fight Against Corona: आयुर्वेद की खुराक के आगे कोरोना ने टेके घुटने, जानिए कैसे 12 दिन में पॉजिटिव से निगेटिव हुए मरीज
यह आयुर्वेद की चमत्‍कार था मेरठ के छह मरीज 12 दिनों में निगेटिव हो गए। पतंजलि शोध संस्थान इस ट्रायल को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजेगा।

मेरठ,[संतोष शुक्ल]। Fight Against Corona कोरोना संक्रमण से निजात को लेकर दुनियाभर के विज्ञानी अंधेरे में हैं, लेकिन आयुर्वेद ने उम्मीदें रोशन की हैं। पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने मुलायम सिंह यादव मेडिकल कालेज के कोविड वार्ड में भर्ती छह मरीजों पर क्लीनिकल केस स्टडी की। ये सभी 12 दिनों में निगेटिव हो गए। पतंजलि शोध संस्थान इस ट्रायल को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजेगा।

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आयुर्वेद से हारा वायरस

मेरठ में एक निजी अस्पताल में छह लोग कोरोना पॉजिटिव मिले थे। इन्हें कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया। पतंजलि ने मरीजों की सहमति से क्लीनिकल केस स्टडी की। आचार्य ने बताया कि देशभर में पांच सौ कोरोना पॉजिटिव मरीजों पर इस दवा का अध्ययन किया गया है। मरीजों को नाश्ते से एक घंटा पूर्व प्रत्येक नासिका में चार बूंद अणु तेल, दो गोली श्वासारि बटी, शुद्ध गिलोय बटी की दो गोली, शुद्ध अश्वगंधा और तुलसी घनवटी की एक-एक गोली गुनगुने जल के साथ दी गई। ये सभी मरीज 31 मई से 12 जून के बीच निगेटिव हो गए।

सिर्फ आयुर्वेदिक दवा ली

मेडिकल कालेज के प्रोफेसर डा. टीवीएस आर्य ने कहा कि कोरोना संक्रमण से मुक्त होने से मरीजों को 14 से 27 दिन तक लग सकते हैं। आयुर्वेद दवा से वायरस जल्द नष्ट हुआ। जयभीमनगर के 30 साल के युवक ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान सिर्फ आयुर्वेदिक दवा ली और जल्द ठीक हुआ। उसके साथ संक्रमित हुए सभी छह लोगों ने भी सिर्फ आयुर्वेदिक दवा ली।

फेफड़े की सूजन खत्म करती है श्वासारि बटी

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि अश्वगंधा में मिलने वाला फायटोकेमिकल और विथेनान कोरोना को मानव कोशिकाओं में प्रवेश नहीं करने देता है। यह शोध स्प्रिंगर नेचर के वायरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित भी हुआ है। इसी प्रकार गिलोय में मिलने वाला टिनोकार्डिसाइड और तुलसी का एंटी वायरल गुणधर्म कोरोना से पूरी तरह बचाव करने में सक्षम मिला है। इसी प्रकार श्वासारि रस या बटी फेफड़ों में सूजन और बलगम को खत्म करने में काफी कारगर रहा। यह शोध बायोमेडीसिन और फार्मोकोथेरेपी मेडिकल जर्नल में छपा है। इसके साथ ही अणु तेल भी मरीजों के लिए बेहद कारगर है।

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इनका कहना है

मैंने मेरठ मेडिकल कालेज के कोरोना मरीजों के इलाज की अनुमति मांगी है। जयपुर में कोरोना मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल भी किया गया है। गत दिनों मेरठ के एक निजी अस्पताल के छह संक्रमित मरीजों पर क्लीनिकल केस स्टडी की गई, जो सिर्फ 10-12 दिनों में ठीक हो गए। ये दवाएं शोध में कोरोना वायरस को पूरी तरह खत्म करने में सफल पाई गई हैं। मेरठ के अस्पताल के क्वारंटाइन में गए 40 लोगों को दवाएं दी गईं और सभी संक्रमणमुक्त रहे। अश्वगंधा, गिलोय, श्वासारि बटी और अणु तेल चमत्कारिक औषिधयां हैं।

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– आचार्य बालकृष्ण, प्रधान वैद्य, पतंजलि आयुर्वेद शोधपीठ, हरिद्वार

एल-1 केंद्रों पर मरीजों की सहमति से आयुर्वेदिक दवाएं व काढ़ा दिया जाता है। इसके लिए किसी कमेटी की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। स्वास्थ्य विभाग की सहमति से मेरठ में छह मरीजों को आयुर्वेदिक दवाएं दी गईं, जो दस दिन में निगेटिव आ गए।

– डा. राजकुमार, सीएमओ, मेरठ 

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