कोलकाता (kolkata)में देश भर के जुटे विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों ने दशकों से जुटाए गए आंकड़ों को सामने रखकर जलवायु परिवर्तन की खतरनाक तस्वीर पेश की गई। बताया गया कि इसी गति से ग्लोबल वार्मिंग जारी रही तो वर्ष 2080 तक कोलकाता का अधिकतम तापमान 49.6 डिग्री तक पहुंच जाएगा।

कोलकाता.
महानगर कोलकाता में देश भर के जुटे विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों ने शुक्रवार को जी-२० व जलवायु परिवर्तन के राष्ट्रीय व प्रादेशिक परिप्रेक्ष्य विषय पर लंबी चर्चा की। चर्चा के दायरे में आपदाओं से निपटने के तरीकों पर मंथन किया गया। दशकों से जुटाए गए आंकड़ों को सामने रखकर जलवायु परिवर्तन की खतरनाक तस्वीर पेश की गई। बताया गया कि इसी गति से ग्लोबल वार्मिंग जारी रही तो वर्ष 2080 तक कोलकाता का अधिकतम तापमान 49.6 डिग्री तक पहुंच जाएगा।
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भविष्य की सुरक्षा पर्यावरण से जुड़ी-
भविष्य की सुरक्षा पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ी हई है। चक्रवाती तूफान अम्फान से ही १३ मिलियन लोग प्रभावित हुए। १३ बिलियन डालर का नुकसान हुआ। देश की जीडीपी का तीन प्रतिशत नुकसान ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से हो रहा है। पर्यावरण से जुड़े नुकसान की भरपाई, उससे निपटने के लिए जरूरी संसाधनों का एक तिहाई सहयोग ही अभी प्राप्त हो रहा है। सुंदरवन के ४५ लाख लोगों में से १५ लाख लोग आपदा का शिकार हैं। जिनका कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग से कोई लेना देना नहीं है। देश भर में सबसे ज्यादा चक्रवाती तूफान प्रभावित जिला दक्षिण २४ परगना है। यहा रेकार्ड इतिहास में औसतन १.६ चक्रवाती तूफान हर साल आए हैं। तीन बड़े चक्रवाती तूफानों में राज्य को १.५ लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। ग्लोबल वार्मिंग पर नियंत्रण नहीं किया गया तो २०८१ से लेकर अगले कुछ दशकों में कोलकाता का अधिकतम तापमान ४९.६ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। सुंदरवन का तापमान ४५. ६ डिग्री होगा। दार्जिलिंग का तापमान अगले कुछ दशकों में दिल्ली के तापमान मे ंहो रही बढ़्ोतरी की दर को लांघ देगा।
जयंत बसु- निदेशक- ईएनजीआईओ
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रिटर्न पाने के लिए राशि देना ठीक नहीं
जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड मुहैया कराने वाली एजेंसियां व बैंक रिटर्न की संभावनाओं पर निर्णय लेते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं है। जलवायु परिवर्तन की रोकथाम के लिए सहायता राशि का दो तिहार्ई खर्च किया जा रहा है। जबकि अनुकूलन से जुड़ी योजनाओं को एक तिहाई राशि भी नहीं मिल रही है। कोशिश अनूकूलन के मॉडल पर भरोसा करने की होनी चाहिए। नुकसान के आंकलन में इको सिस्टम को हुई क्षति भी जोड़ी जानी चाहिए। जी-२० के मंच पर नुकसान व क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर अपनी बात उठाने का अवसर है।
डॉ. नीलांजन घोष- निदेशक ओआरएफ
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सब्सिडी के मॉडल पर विचार करें सरकारें
अलग- अलग देशों की सरकारों को अपने सब्सिड़ी मॉडल पर पुर्नविचार करना चाहिए। एक ओर नॉन फासिल र्इंंधन को बढ़ावा देने की नीतियां बनाई जा रही हैं तो दूसरी ओर फॉसिल ईंधन पर हर मिनट विश्व भर में ११ मिलियल डॉलर की सब्सिडी दी जा रही है। भारत को विकासशील देश का अगुवा बनकर संकटग्रस्त देशों को सहायता देनी चाहिए। अपना अनुभव बढ़ाना चाहिए।
हरिजीत सिंह – प्रमुख- ग्लोबल पॉलिटिकल स्ट्रेटजी ऑफ क्लाइमेट एक् शन नेटवर्क
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जोखिमों का उचित मूल्यांकन जरूरी
कई मामलों में हमारे अनिभिज्ञता ही समस्याओं के समाधान में आड़े आती है। आजादी के ७० साल हो गए अब तक सुंदरवन की कई नदियों की गहराई भी नहीं पता की जा सकी है। सन १९०३ के बाद कोलकाता की समुद्र तल से ऊंचाई नहीं मापी गई है। सुंदरवन खतरे से जूझ रहा है। बढ़ते जलस्तर के कारण २० साल में ११० वर्ग किमी क्षेत्र में फैला मैंग्रेाव नष्ठ हो गया है। जोखिमों का मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है। सामुद्रिक विज्ञान के क्षेत्र में काफी कुछ किया जा सकता है। यह क्षेत्र उपेक्षित है। जी- २० के मंच पर उपनिवेशवादी देशों के पूर्व में पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकसान पर भी चर्चा होनी चाहिए। क्षतिपूर्ति का मॉडल विकसित किया जाना चाहिए। सुंदरवन में १०० मेगावाट टाइडल ऊर्जा जेनरेट करने की क्षमता है।
सुगत हाजरा- प्रो. जादवपुर विश्वविद्यालय-
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तटबंध तो असल खतरा हैं
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफानों की गति में लगातार इजाफा हो रहा है। उनसे बचने के लिए तटबंध बनाने की योजनाएं और नुकसान बढ़ाएंगी। कई इलाकों में मानव बस्तियां तटबंधों के कारण जलस्तर के नीचे चली गई है। तटबंध प्राकृतिक रूप से भरपाई की राह में बाधा बनते हैं।
सुनंदो बंद़्योपाध्याय- प्रो. कोलकाता विश्वविद्यालय
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विशेष अनुदान मांगे पूर्वी भारत के राज्य
पूर्वी भारत और उत्तर पूर्व के राज्य कोयला आधारित विद्युत केन्द्रों पर निर्भर हैं। पश्चिम बंगाल की ऊर्जा जरूरतो ंका ९६ फीसदी हिस्सा कोयले आधारित विद्युत केन्द्र पूरा करते हैं। इस क्षेत्र को केन्द्र सरकार से सौर ऊर्जा समेत नॉन फॉसिल ऊर्जा के साधनों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अनुदान मांगना चाहिए। बंगाल सरकार को यह समझना होगा कि देउचा पचामी जैसी कोयला योजना को प्राथमिकता देने से पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को पूरा बल नहीं मिल पाएगा। राज्य सरकार को सौर ऊर्जा नीति तैयार करनी चाहिए। सौर ऊर्जा के डेवलपर को सहूलियतें देनी होंगी।
एसपी गनचौधरी- चेयरमैन सौर ऊर्जा विशेषज्ञ कमेटी, भारत सरकार
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भारत करे विश्व का नेतृत्व
जी- २० की प्रेसीडेंसी पाने को लेकर ढोल पीटा जा रहा है। असल में इसे अवसर में बदलने की जरूरत है। भारत को क्लाइमेंट चेंज के मुद्दे पर विश्व का नेतृत्व करना होगा। इसके साथ ही कोयला खानों के धंसान, पर्यावरण आपदा के शरणार्थियों के प्रश्र भी महत्वपूर्ण है।ं
– सौगत राय – सांसद तृणमूल कांग्रेस
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अभियान व आंदोलन दोनों जरूरी
पर्यावरण बदलाव के बड़े मुद्दे पर लोगों के विचार जानने के लिए कोलकाता कॉन्फ्रेंस ऑफ पीपुल का आयोजन किया जाएगा। जिसमें अंशधारक, विशेषज्ञों के सुझाव लिए जाएंगे। नगर निगम कोलकाता को फॉसिल फ्यूल मुक्त शहर बनाने की दिशा में जुटा हुआ है। पर्यावरण की रक्षाके लिए अभियान और आंदोलन दोनों जरूरी हैं।
– देवाशीष कुमार- विधायक- एमएमआइसी कोलकाता नगर निगम
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पर्यावरण से जुड़ी है आर्थिक सुरक्षा
जी -२० आर्थिक सुरक्षा का मंच है। यह ध्यान देना चाहिए कि आर्थिक सुरक्षा पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
– संजय वशिष्ट- निदेशक क्लाइमेट एक् शन नेटवर्क साउथ एशिया-
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संवाद जरूरी
आपदा द्वार पर खड़ी है। समाज के सभी लोगों को क्या करना है यह अब तय हो जाना चाहिए। संवाद होना जरूरी है।
स् नेहाशीष सूर- अध्यक्ष प्रेस क्लब
NOTE – This article was originally published in patrika and can be viewed here
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