
रिपोर्ट:- सतीश भारतीय
भारत एक कृषि प्रधान देश है। ऐसा हम सदियों से कहते-सुनते आ रहे हैं। इसकी वजह यह कि देश की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा आजीविका के लिए कृषि पर आश्रित है। मगर, सदियों से कृषि की चुनौतियां किसानों को कृषि छोड़ने और आत्महत्या करने पर विवश करती रही हैं।
आज के दौर में खेती-किसानी करने के लिए पर्याप्त संसाधन है। फसलों के लिए रासायनिक दवाएं भी उपलब्ध है। मगर, वर्तमान में कृषि योग्य भूमि सीमित होती जा रही है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है। पर्यावरण में जो परिवर्तन हो रहे हैं उससे भी कृषि को क्षति पहुंच रही है। हालत यह है कि छोटे किसान कृषि छोड़ रहे या कृषि करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। वहीं युवाओं का रूझान भी कृषि की ओर नहीं है।
ऐसे में कृषि के विकास हेतु मध्यप्रदेश के सागर में रहने वाले आकाश चौरसिया ने मल्टीलेयर कृषि प्रणाली का अविष्कार किया। यह कृषि प्रणाली कृषि के क्षेत्र में एक मिशाल बनकर उभर रही है। जिससे भारतीय कृषि और कृषकों को समृद्धि और आत्मनिर्भरता का एक नया रास्ता मिला है।

कौन है आकाश चौरसिया
आकाश चौरसिया मध्यप्रदेश के सागर में निवासरत् है। वे पान की खेती करने वाले परिवार से आते हैं। आकाश का सपना शुरू से एक डॉक्टर बनना था। मगर, 21 वीं सदी की भयाभय स्थिति के कारण उन्होंने एक किसान बनना स्वीकार किया। वर्ष 2009 से उन्होंने खेती के क्षेत्र में कार्य करना आरंभ किया और खेती के जरिये रसायन मुक्त भोजन उपलब्ध कराकर उन्होंने समाज सेवा को प्राथमिकता दी।
वर्ष 2014 में आकाश चौरसिया ने ‘मल्टीलेयर एग्रीकल्चर तकनीक’ का अविष्कार किया। यह किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का एक रास्ता है।
इससे साथ-साथ आकाश ने कृषि के क्षेत्र में 6 नवीन तकनीकें विकसित की। यह तकनीकें क्रमश: बहुपरत कृषि, जल पुनर्भरण और मृदा संरक्षण की विधियाँ, प्राकृतिक तरीके से रसायन खाद की विधियाँ, चयन विधि द्वारा स्वदेशी बीजों का संरक्षण हैं।
आकाश चौरसिया का कृषि में योगदान और सम्मान
आकाश चौरसिया की बहुपरत कृषि तकनीक 70-80 प्रतिशत पानी की बचत करती है। उन्होंने 105 प्रकार के स्वदेशी बीजों का संरक्षण किया है। देश के बीजों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सिलेक्शन विधि तैयार की और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 250000 से अधिक किसानों को देशी बीज वितरित किया। फसल उत्पादन में 15-20 प्रतिशत वृद्धि की है। दुग्ध उत्पादन में 15 प्रतिशत वृद्धि की। केंचुआ दक्षता में 25 प्रतिशत सुधार किया। उन्होंने भारतीय कृषि दर्शन किसान पुस्तकालय की स्थापना भी की। इस पुस्तकालय 5000 से पुस्तकों का संग्रह किया गया है।
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आकाश कृषि के क्षेत्र में 1,41,500 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। वे दुनियाँ भर में प्राकृतिक खेती की शिक्षा में 14-15 लाख लोगों तक पहुँचे। वैश्विक स्तर पर वे 560 से ज्यादा कृषि व्यवहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर चुके हैं। उन्होंने लगभग 90000 हजार एकड़ भूमि को प्राकृतिक खेती में सफलतापूर्वक परिवर्तित किया है। गाय आधारित खेती को बढ़ावा देने के कारण आज उनके मार्गदर्शन पर 10,500 लोग गाय पालन कर रहे हैं। उन्होंने देश के 25 विश्वविद्यालयों में गौ-आधारित खेती पर व्याख्यान दिये हैं। आकाश की सफलता की कहानियों को बहुत से राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय समाचार समूहों ने कवरेज किया है।
आकाश को कृषि के क्षेत्र में उन्नत कार्य करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘युवा ग्राम मित्र’ का खिताब दिया। वहीं, पूर्व उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने ‘कृषि रत्न’ की उपाधि दी।
वर्ष 2016 में स्वामी रामदेव द्वारा कृषि गौरव सम्मान दिया गया। फिर उसके बाद व्यवसायी आनंद महिंद्र ने युवा समृद्धि का किताब दिया। वर्ष 2017 में उद्योगपति नवीन जिंदल ने राष्ट्रीय स्वयं सिद्ध रोलर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट के क्षेत्र में नावाज़ा। इसके बाद उन्हें कृषि के लिए 5 लाख रुपए का पुरुस्कार मिला। आकाश को जैविक इंडिया अवार्ड भी मिला। आकाश चौरसिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई संस्थाओं द्वारा नावजे गए। जेसीआई इंडिया और जेसीआई जापान ने भी उन्हें कृषि के विकास हेतु सम्मानित किया।

कृषक आकाश चौरसिया से संवाद
जब हमने आकाश चौरसिया से मल्टीलेयर कृषि के क्षेत्र में उनके कार्य और विचार को लेकर संवाद किया, तब वह बताते हैं कि,
“मेरी रुचि मेडिकल लाइन में जाने की थी। जब मैं अस्पतालों से जुड़ा, तब मैंने देखा कि जिस तरह लगातार बीमारियां बढ़ रही है, उसी तरह अस्पतालों और मरीजों की संख्या लगातार भी बढ़ रही है। जब बीमारियों को लेकर चिंतन किया, तब समझ आया कि डॉक्टर बन के हम बीमारी को ठीक कर सकते हैं, लेकिन बीमारी के कारण को ठीक नहीं कर सकते हैं।”
“ऐसे में बचपन से मेरे जे़हन में समायी वह बुन्देलखण्डी कहावत मुझे याद आ गयी कि, “जैसा खाओगे अन्य वैसा होगा मन। जैसा होगा मन वैसा होगा तन।” इस कहावत से समझा जा सकता है कि, स्वास्थ्य से संबंधित सब कुछ खान-पान से जुड़ा हुआ है।
अब मैं भली-भांति समझ चुका था कि, खान-पान अच्छा होने से लोग बीमार नहीं होंगे। तब मैंने डॉक्टर बनने का सपना छोड़ दिया और किसान बनना स्वीकार लिया। मैं बीते 15-16 साल से किसानी पर काम कर रहा हूँ। आज जो कृषि के अंदर जो समस्याएं है उनका समाधान तलाश रहा हूँ।”
जब हमने आकाश से सवाल किया कि, मल्टीलेयर कृषि तकनीक का आईडिया आपके दिमाग में कैसे आया? तब आकाश बताते हैं कि,
“जब हमने शहरों में जाकर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग को देखा। तब सोचा कि, जब लोग शहरों में एक मकान के ऊपर कई मकान बना रहे हैं। इस स्थिति में भी आसानी से निवास कर रहे हैं। तब क्या हम एक फसल के साथ कई फसल नहीं उगा सकते। इस विचार के साथ हमने जमीन पर कई फसलें उगाने के प्रयोग किए। इन प्रयोगों में हमें 4-5 साल लगे। तब जाकर फाइनली हमने 2014 में एक ऐसा मॉडल बनाया जिसको हमने मल्टीलेयर एग्रीकल्चर का नाम दिया।”
वें आगे जिक्र करते हैं कि, “आज हम एक ही खेत में 40-45 तरह की फसलें उगा रहें हैं। इस फसलों में धनियाँ, पालक, मैथी, चुकंदर, प्याज, लहसुन, पपीता, गाजर, मूली, सहजन जैसी कई फसलें हैं। मल्टी लेयर कृषि से पानी और खरपतवार सहित अन्य संसाधनों की बचत भी हो रही है। मल्टी लेयर कृषि से हम लगभग 70-80 प्रतिशत पानी बचा सकते हैं।”
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए आकाश गोबर के खाद को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका सुझाव है कि, “खेतों के अंदर गाय के गोबर कम्पोस्ट 10 टन प्रति एकड़ डालने से मिट्टी में कार्बन बढ़ता है। जिससे उपज क्षमता बढ़ती है। जहां गोबर खाद नहीं है, वहाँ उड़द और मूंग जैसी फसलों को लगाएं, जिससे खाद की ज्यादा आवश्यकता नहीं होगी।”
मल्टीलेयर कृषि तकनीक सिखाने के संबंध में आकाश कहते हैं कि, “हमारे यहाँ देश-विदेश से जो मल्टीलेयर कृषि तकनीक सीखने आ रहे हैं, उन्हें हम बेहतर ढंग से सिखा रहे हैं। खासकर दूर-दराज के किसान जो कई समस्याओं से घिरे हैं। मल्टीलेयर कृषि तकनीक का फायदा हमारे किसानों को आत्महत्या नहीं करने देगा। अब सरकार भी प्राकृतिक खेती के मुद्दे को लेकर पहल कर रही है ताकि कृषि से और लाभ कमाया जा सके”
आकाश अपनी कृषि भूमि और कृषि से लाभ का जिक्र करते हुए बोलते हैं कि, “अभी हमारे पास सागर में तीन कृषि फॉर्म हैं कृषि करने के लिए। हम करीब 25 एकड़ में कृषि कर रहें हैं। प्राकृतिक तरीके से खेती करने पर हमारा सालाना 40 से 50 लाख रूपए का टर्नओवर होता है। किसी-किसी साल टर्नओवर 35 से 40 लाख के बीच होता है। हमारे पास 12 से 15 लोगों टीम है। जो हमें कृषि कार्यों में मदद करती है।”
जब हमने यह सवाल किया कि, मल्टीलेयर कृषि तकनीक ज्यादा से ज्यादा किसानों तक कैसे पहुंचेगी और इसको लेकर आप क्या प्रयास कर रहे हैं? इसके जवाब में आकाश कहते हैं कि, “मल्टीलेयर कृषि के देश-दुनियां में विस्तार हेतु हम नि:शुल्क कृषि प्रशिक्षण शिविर चलाते हैं। इन शिविर
में देश-दुनियां से लोग मल्टीलेयर कृषि तकनीक सीखने आ रहे हैं। मल्टीलेयर कृषि के विकास हेतु हमारी टीम एक चेन के मुआफिक काम कर रही है। जिससे मल्टीलेयर कृषि की प्रभावोत्पादकता देश-दुनियां में पांव पसार रही है। हमें यकीन हैं कि, मल्टीलेयर कृषि के जरिये देश-दुनियां के किसान तरक्की करेगें और लोगों के लिए शुध्द खाद्यान्न की उचित व्यवस्था करेगें।”

मल्टीलेयर कृषि तकनीक सीखने आए किसानों से बातचीत
कृषक आकाश चौरसिया द्वारा चलाए जा रहे मल्टीलेयर कृषि प्रशिक्षण में देश के अलग-अलग हिस्सों से छोटे-बड़े किसान कृषि प्रशिक्षण लेने आ रहे हैं।
मल्टीलेयर कृषि प्रशिक्षण लेने आए किसानों में एक नाम किसान रमेश गैरा का है। रमेश गैरा केसर की खेती के लिए देश में प्रसिद्ध हैं।
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रमेश से बात करने पर वह बताते हैं कि, “मैं एक क्वालिफाइड इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं और मैं नोएडा रहता हूं। अभी मैं 65 वर्ष का हूँ। 35-36 साल मैंने कॉरपोरेट सेक्टर में मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब की है। नौकरी मैं बहुत सीनियर पोजीशन कर रहा हूं। इस 35-36 साल नौकरी करने पर बहुत दुनियां घूमने का मौका मिला। मैं 10 से अधिक देश में गया हूं। बचपन से ही मेरा कृषि के क्षेत्र में रुझान था। वर्ष 2017 में 58 साल की उम्र में मैंने नौकरी से रिटायरमेंट ले लिया था।”
इसके आगे रमेश कहते हैं कि,
“जब मैंने एडवांस कृषि फार्मिंग तकनीक के बारे में अध्ययन किया, तब मुझे गूगल सर्च के मध्यम से कृषि के क्षेत्र में उन्नत कार्य करने वाले आकाश चौरसिया के बारे में पता चला। आकाश जी के बारे में पढ़ने के बाद, मैंने दिमाग में बिठा लिया की मुझे आकाश जी से मल्टी लेयर कृषि के बारे में सीखना है। तब मैं दिल्ली (नोएडा) से सागर शहर चला आया।”
“सागर आकार आकाश जी से मिला और उनका कृषि फार्म देखा सागर की कृषि देखी, तब मुझे अपना बचपन याद आ गया। बचपन में खेतों में घूमना, काम करना और प्राकृतिक सौन्दर्य की अनुभूति करना याद आ गया।”
“मल्टी लेयर कृषि तकनीक की ट्रैनिंग लेने दौरान हमें मल्टी लेयर कृषि क्या है? इसको करने के बेसिक प्रिंसिपल्स, संसाधनों का उपयोग और अन्य जरूरी तथ्य बताए गए।”
रमेश आगे कहते हैं कि, “कुछ समय मैंने केसर की खेती घर के कमरे में की है। मल्टी लेयर कृषि तकनीक जरिए और भी फसलें उगाना चाहता हूँ। मैं जब मल्टी लेयर कृषि तकनीक में पारंगत हो जाऊंगा और कृषि में विकास करूंगा। तब मैं भी देश-दुनियाँ के लिए मल्टी लेयर कृषि तकनीक के मुफ़्त ट्रैनिंग शिविर शुरू करूंगा।”
आगे हम मल्टीलेयर कृषि सीखने आयी प्रणति जैन से बातचीत करते हैं।
प्रणति बताती हैं कि,
“मुझे मेरी टीचर जैविक कृषि के बारे में पढ़ातीं थीं। इस पढ़ाई के दौरान वह कृषि के विकास को लेकर आकाश जी का उदाहरण देती थीं। टीचर ने शहर से आकाश जी का भी उदाहरण दिया था। मुझे भी पहले उनकी तरह डॉक्टर बना था, पर जब उनके विचार मैंने सुने, तब मुझे ज्ञात हुआ कि, लोगों की बीमारीयों का कारण खान-पान है। अस्पताल बढ़ने से बीमारियाँ कम नहीं होगीं। खान-पान में शुध्दता से बीमारियाँ कम होगीं। इसी भाव ने मेरे अंदर जैविक कृषि करने का जज्बा पैदा किया।”

वह आगे बोलती हैं कि,
“आज पर्यावरण के विपरीत बहुत कुछ हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें जैविक कृषि को प्राथमिकता देनी होगी। हमें मल्टी लेयर कृषि फार्मिंग का फार्मूला अपनाना होगा। जिससे कृषि की गुणवत्ता और उपज में सुधार हो सके। आज मैं मल्टी लेयर कृषि फार्मिंग इसलिए सीख रही हूँ, ताकि, मल्टी लेयर कृषि में कुछ नया और बेहतर कर सकूं। जिससे एक अच्छी खाद्य सुरक्षा से समाज को स्वस्थ और मजबूत बनाया जा सके।”
वेद व्रत यादव मल्टीलेयर कृषि तकनीक का प्रशिक्षण लेने भिवाड़ी राजस्थान से आये हैं।
वेद व्रत फरमाते हैं कि, “मेरे पास 20 से 30 गिर नस्ल की गायें हैं। गायों के दूध से मैंने डेरी फार्म किया हुआ है।
इसके साथ में तीन एकड़ जमीन में जैविक कृषि फार्मिंग कर रहा हूं। जैविक कृषि फार्मिंग में परिपक्वता लाने के लिए मैं आकाश जी के यहां प्रशिक्षण लेने आया हूँ।”
वे आगे बोलते हैं कि, “आकाश जी, हमें बताते हैं कि, फसलों की पैदाइश कैसे बढ़ाए, फसलों का बाजार और मंडी में कैसे एक अच्छा मूल्य तय करें। अभी मैं विशेष रूप से हल्दी और अदरक की कृषि सीखने में रूचि ले रहा हूँ। इन्हीं की खेती करना मुझे भाता है। मैं चाहता हूँ कि, प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करके हल्दी, अदरक जैसी अन्य फसलों को रासयनिक दवाओं के प्रयोग से बचाया जाए। ताकि, दुनियाँ में निर्यात किये जा रहे हमारे मसालों की प्रमाणिकता और शुद्धता में इजाफा हो सके और हम अच्छे मसाले लोगों तक पहुंचा सके।”
राजस्थान से मल्टीलेयर कृषि के गुण सीखने आये हैं प्रभु सिंह खंगार।
वह नेवी से रिटायरमेंट कमांडो हैं।
प्रभु सिंह बताते हैं कि, “मैं 2016 से आकाश चौरसिया जी को फॉलो कर रहा था, इनको यूट्यूब पर देख रहा था। इनकी कृषि की समझ आज छोटे-बड़े किसानों के लिए लाभान्वित कर रही है। मल्टी लेयर फार्मिंग एक ऐसी कृषि प्रणाली है, जिससे छोटे किसानों को उभारा जा सकता है।
कुछ दिनों पहले हम लोगों ने प्राकृतिक खेती करना चालू किया है, ताकि अपने आस-पास खेती-किसानी में सुधार कर सकें।
मेरे जीवन का बेसिक लक्ष्य यह है कि हर किसान के खेत में एक छोटा सा जंगल हो। जो आपको यहां आकाश चौरसिया के कृषि फार्म हाउस पर दिख रहा है। अगर, किसान के पास एक छोटा सा ज़गल होगा, तब उसके पास सुकून होगा और कृषि संरक्षण में मदद मिलेगी”
आगे प्रभु अपना अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि, “हम देखते आ रहे हैं कि, दिनों-दिन खेतों की मेड़ें छोटी होते हुए, सिमटती जा रही है। जिससे खेतों और कृषि की जैव विविधता खत्म हो रही है। आज खेत में मेड़ों का स्थान तारबंदी लेती जा रही है। जब हम खेतों और ज़मीन को आराम देने के लिए, कुछ महीनों के लिए कृषि की छुट्टी करते हैं, तब खेत एकदम खाली हो जाते हैं। खाली खेतों की मेंड़ों के पास रह रहे, छोटे-छोटे कीड़े खत्म हो जाते हैं। जिससे भूमि की उपजाऊ स्थिति खराब होने लगती है। ऐसे में हमें खेतों की तारबंदी के वजाय चौड़ी मेंड़ बंदी करवाना जरूरी है।”
आगे हमने मल्टीलेयर लेयर कृषि प्रशिक्षु त्रीलेश सिंह राजू से संवाद किया।
वह बताते हैं कि, “मैं आंध्र प्रदेश नेल्लोर जिला का निवासी हूँ। पहले मैं इंडस्ट्री में काम करता था। इंडस्ट्री में काम करते-करते मैं बीमार हो गया था। मैं बीमार क्यों हो रहा हूँ, जब मैंने यह चिंतन किया। तब पता चला, गलत और अशुद्ध खान-पान, अच्छी हवा, पर्यावरण ना मिलना ही मुझे बीमार बना गया। जब मैं धीरे-धीरे खेती से जुड़ा और अपनी जीवन शैली में परिवर्तन किया। तब मैं स्वास्थ्य होने लगा।”
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त्रीलेश सिंह राजू का कहना है कि,
“खेती के लिए शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण कैसे बनाया जाए इसके लिए में सतत प्रयास कर रहा हूँ। खेतों की अशुद्धता, कृषि की अशुद्धता से जिससे तरह आज हमारी फसलें सड़ती, गलती, सिकुड़ती और बर्बाद होती है। उसी तरह जब हमें शुद्ध खाना नहीं मिलेगा। हम रासायनिक दवाओं से उपजे खाद्य पदार्थ खायेगें। तब हमारें स्वास्थ्यप्रद जीवन जीने की क्षमताएं घटने लगेगी। हम चाहते हैं, शुद्ध खेती से शुद्ध खान-पान की ओर बढ़े और अपना जीवन स्वास्थ्य बनायें।”
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे विदिशा जिले से मल्टीलेयर कृषि के बारे में जानने-समझने आए राजीव का कहना है कि,
“आकाश जी को खेती करते देखा तब कृषि के प्रति मेरी चाह भी बढ़ गयी। मैंने यहां कृषि फार्मिंग में सीखा कि, कैसे कम लागत में उचित मुनाफा कमा सकते हैं। मल्टी लेयर फार्मिंग में लकड़ी का स्ट्रक्चर तैयार करने में लगात लगती है। एक बार जब स्ट्रक्चर तैयार कर लेते हैं। तब तीन से पांच साल तक भी खेती कर सकते हैं।”
राजीव आगे सुझाव देते हैं कि,
“आज बहुत से क्षेत्र का विकास हो चुका है। लेकिन, कृषि का विकास वैसे नहीं हुआ जैसे होना चाहिए। यदि हमें कृषि का विकास वाकई करना है, तब युवाओं को कृषि के क्षेत्र में वैसी ही सक्रियता दिखानी होगी जैसी युवा अन्य क्षेत्रों में दिखाते हैं। युवा जब कृषि क्षेत्र में आयेगा, तब कृषि और कृषि में अच्छी तकनीक का विकास होगा। जिससे कृषि समृद्धि की ओर अग्रसर होगी।”
कृषि को लेकर कुछ नया करने की चाह लेकर जिला सिंगरौली से सागर आयीं सतकुमारी जायसवाल जैविक खेती पर काम करती है।
सतकुमारी का मानना है कि, “यह प्रशिक्षण शिविर वास्तव में हमारे कृषि के प्रयोगों को आधार दे रहा है। सदियों से महिलाओं का कृषि के क्षेत्र में अहम योगदान रहा है। ऐसे में हम और कृषि के नवाचार सीख कर कृषि को नये आयाम देगें। जिससे कृषि के प्रगति की दिशा मजबूत हो”
सतकुमारी के साथ ही सिंगरौली से मल्टीलेयर कृषि सीखने आये हैं निखिल।
वह कहते हैं कि, “मैं पिछले 5 साल से किसानों को लेकर काम कर रहा हूँ। किसानों की समस्याओं और दर्द से हम भलीभाँति परिचित है। आज का किसान ना सिर्फ जलवायु परिवर्तन से किसानी में आ रही समस्याओं से परेशान है, बल्कि कृषि के जरिये पैदा हुयी फसलों का सही मूल्य प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में किसानों को लाभ पहुंचाने के लिहाज से एक उभरती कृषि प्रणाली मल्टीलेयर कृषि फार्मिंग हमारे सामने है। मल्टीलेयर कृषि फार्मिंग एक ऐसा विकल्प है, जिससे कृषि को सहज और सरल बनाया जा सकता है।
निखिल मल्टीलेयर कृषि से मुनाफे का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि,
“अभी हमने एक एकड़ भूमि पर
₹200000 रुपये खर्च किये और भिन्न-भिन्न फसलों को तैयार किया। इन फसलों से हमें 9 से 10 लाख रुपये तक का फायदा हुआ है।
इसी तरह के उदाहरण हमें मल्टीलेयर खेती करने के लिए प्रेरित करते हैं। मल्टीलेयर खेती से लागत के बदले कई गुना लाभ कमाया जा सकता है। वाकई मल्टीलेयर कृषि किसानों के सुनहरे भविष्य का सही और मजबूत रास्ता है।”
ध्यातव्य है कि, आज के वर्तमान दौर में जिस तरह कृषि कठिनाइयों से गुजर रही है, उससे किसानों के हालात बिगड़ रहे हैं। ऐसे में कृषक आकाश चौरसिया जैसे उदाहरण भी देश में पैदा हो रहे हैं, जो मल्टीलेयर कृषि के जरिये देश-दुनियां की कृषि को एक नया रास्ता दे रहे हैं। आकाश की मल्टीलेयर कृषि प्रणाली का फैलाव सही मायनों में देश के किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक तौर पर मजबूत बनायेगा। ऐसे में देश की कृषि में व्याप्त चुनौतियां हल होगीं और मल्टीलेयर कृषि देश-दुनियाँ की कृषि को एक नया आधार देगी। जिससे कृषि का विकास तेजी होगी।
(सतीश भारतीय एक स्वतंत्र पत्रकार है। वह सागर मध्यप्रदेश में रहते हैं)
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